सोमवार, 23 अगस्त 2010

कभी अलविदा ना कहना ...

एक रश्म है जिसकी अदायिगी करतें हैं
उस मक़ाम पे है की तुझे विदा हम कहतें हैं
जैसा भी रहा पर ये रिश्ता खाश है
कभी न टूटेगा ये मेरा अटल विश्वास है
क्या तेरा , क्या मेरा ये बड़े विचार है
लेन देन पर ही क़ायम मेरे विश्वास हैं
लेनदेन के चलन को अनवरत क़ायम रखना
मेरी तरफ की कमियों को खुद ही वहन करना
कुछ इसी बुनियाद पे ये रिश्ता जुडा था
तेरी दौड़ देख के मुझे चलना पड़ा था
इसी वजय से तुझे विश्वास कहता हूँ , कभी न टूटने वाली आश कहता हूँ
खुद की सोच है की छोटा है या बड़ा , पर तेरी छाव में ही मैं हूँ खडा
तू जीतनी मुश्किल से सूरज के पास जायेगा, मेरे हित में उतनी ही छाव छोड़ जाएगा
मैं लेन देन का कायल हूँ यही तुम से चाहता हूं ,मे क्या दूंगा अब अपनी सोच बताता हूं
बर्फ सी जिंदगी , पानी सी मौत ,जग जाहिर है वक़्त परिवर्तन लाएंगा
दिल के शोरो से अनजान ,जब ये शोर तुझे डराएगा
जब थक जाएगा धुप में ,मैं छाया बन के आ जाऊंगा
बूढ़े जिस्म में तेरे आपना जोश बार जाउंगा
तुम को देख के मैं जिया था,तुम मुझे देख के जी उठाना
यूँ ही कयाम रखना इस रिश्ते को , कभी अलविदा ना कहना .........
मेरे उन सिनिअर्स के नाम जो मेरे रहनुमा रहे और जो अब कॉलेज से कोर्स ख़त्म करके जा रहे हैं
संदीप दुबे

3 टिप्‍पणियां:

  1. bahut bahut shukriya ....dost ...ye rishta to yun hi kayam rahega hai ....bahut acchi kavita likhi hai aapne ....dhanywaad

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  2. Ankhe Nam ho gayi yaar,,,bahut manmohak kavita...
    ye background readeable nahi hai,,,bahut kathinaayi hoti hai ....lekin nisandeh uchh rachna.

    VIKAS PANDEY

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  3. vikash sir maine background change kr diyaa hai thank u advice dene ke liye
    devesh sir aap b bahut dhnywaad aap ne mujhe promot kiyaa
    thank u for all

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