बुधवार, 23 मार्च 2011

मैंने सोचा ही नहीं !!!!

यूँ बदल जायेंगे हालात ... मैंने सोचा ही नही ...
राह में यादों के ... राख ही राखा मैंने सोचा ही नहीं ...
अगर सोच भी लेते तो क्या कर पाते
होता वही ... जो आये किसम्त को रास ... ये मैंने सोचा ही नहीं
वक़्त के फैसले पे हमेशा से ऐतराज़ ..... क्यों ???
ये मैंने सोचा ही नही ...
मैंने तो सोचा ... की रहे मेरे लिए खास ....
पर क्यों ये ... मैंने सोचा ही नहीं ....
पर मेरे जैसे कई होंगे खास ....
ये मैंने सोचा ही नहीं ......
जली है तो बुझेगी ही हर आग ये मैंने सोचा ही नही
आज बस धुओं की सुगात ये मैंने सोचा ही नहीं ....
तेरी नज़रो में "वफ़ा " का ये हिसाब ... ये मैंने सोचा है नहीं ...
कुसूरवार मैं नही था
फिर गुनाह में हिस्सेदार ये मैंने सोचा ही नहीं ...
बिना इजाज़त कर दे मुझे कोई छोटेपन का एहसास
ये मैंने सोचा ही नही ...
वक़्त का तकाजा था, जूनून था जो होगया
वरना होता नहीं है कोई ऐसे खास
ये मैंने सोचा है नहीं .....(sandip)